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छविचित्र जिसकी फ़र्माइश की जा सकती है. रूस के चित्रकारों के गठबंधन में शामिल छविचित्र बनाने का स्टुडियो

     All paintings are made with love and guarantee. They are made by hand on the base of use-proven technologies and traditions of 17-18 century paintings.

Classic portrait

There are presented portraits painted from nature and from the photo

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Portrait

Still lifes with flowers

On the web site you can find old artists's copies of still life with flowers. All presented here paintings are customized and belong to private galleries in Russia, USA, Germany, Canada, Israel, Luxemburg, France, Italy, UK.

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Still lifes with flowers

Paintings of horses in the order

You can see different equine coat colors in oil on canvas in 2013-2014. You can order copy of any painting you like.

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Paintings of horses

Portrait by your photograph

Portrait with the use of photography is one of the most unique streams in odern portrait art.  » Order

Portrait by your photograph

Seascapes to order

The surf. 60x80 cm., canvas, oil, 2012. Ivan Aivazovsky. Author's copy.  » Go to gallery at Portrets.ru

Seascapes

Seascapes

Site of Moscow artist

चित्रकार विक्तोर दिर्यूगिन.

  • रूस के चित्रकार-छविकारों की संस्था का सदस्य.
  • रूस के चित्रकारों के सृजनात्मक गठबंधन का सदस्य.
  • कनाडा के चित्रकार-छविकारों की संस्था का सदस्य

  • विक्तोर दिर्यूगिन की कला-कृतियों के विषय में
    विक्तोर दिर्यूगिन – मास्को का एक विख्यात चित्रकार-छविकार है। अतीत में उसने चित्रकला-संबंधी पारंपरिक पक्की और गहन शिक्षा प्राप्त की थी तथा अनेक वर्षों के भीतर कला-संबंधी सृजन करते हुए आजकल वह अनुभवप्राप्त भी बने हैं। वह बहुतेरी कलात्मक प्रदर्शनियों का भागीदार होता है। कलाकार द्वारा बनायी गयी कृतियाँ सुप्रसिद्ध हैं और ग्राहकों की दृष्टि में उनकी बड़ी ही माँग होती है। उसके द्वारा बनाये गये छविचित्र देशी-विदेशी संग्रहालयों एवं निजी संग्रहों में उपलब्ध और सुरक्षित भी हैं।
    चित्रकार पारंपरिक कला का अनुगामी है, कला जो पुरातन सौंदर्यविज्ञान और पुनर्जागरण के ऊपर आधारित है, वह अपने व्यावसायिक कौशल में चित्रकला और चित्रण की शास्त्रीय प्रवृत्ति पर अवलंबित होता है।
    सृजन की दृष्टि से, विक्तोर दिर्यूगिन उन्नीसवीं शताब्दी के चौथे-छठे दशकों की रूसी श्रेण्यवाद-विषयक कला की प्रवृत्ति पर आसक्त है, उस प्रवृत्ति के तेजस्वी अनुयायी निम्नांकित हैं: – श्रीमान् किप्रेन्स्कीय ओ., श्रीमान् ब्र्युल्लोव क., और मास्को की चित्रकला-संबंधी शैली का प्रतिष्ठापक, श्रीमान् त्रोपिनिन व.।
    कलाकार की रूसी उत्पत्ति प्राचीन रूस की सौंदर्यपरक संस्कृति का अनुसरण करने में अपनी योग्यता दिखाती है, संस्कृति जिस के लिये कला का आध्यात्मिक लक्ष्य स्वाभाविक रूप से बोधगम्य है, और जो चित्रित किया जानेवाले से प्रतीकात्मक एवं मूलतः सकारात्मक सरोकार को सामान्य जैसी वस्तु मान लेती है। अतः चित्रकार अपने चित्रनायकों को उनके जीवन के उत्तम क्षणों के अवसर पर चित्रित करते हुए, अनुभव करने की उनकी योग्यता एवं आध्यात्मिक जीवन जीने की उत्कंठा को प्रकट करते हुए, वह उतनी बड़ी सक्रियता से मानव के सदाचारी गुण खोजता है। विक्तोर दिर्यूगिन मानव के उच्च आदर्श की ओर सदैव ध्यान देता है, आदर्श जो दिव्य और आध्यात्मिक उद्देश्य के लिये पूर्वनिर्धारित है।
    कलाकार द्वारा बनाये गये रूपचित्रवाले चरित्रों में कोई विशेष भीतरी घबराहट दिखाई नहीं पड़ती, किंतु वे चरित्र स्वाभाविकता एवं आराम के साथ, और कभी घर में जैसा बरताव करते हुए नज़र आते हैं। चित्रकार बड़ी नैसर्गिकता के साथ माडल तथा माडल के चारों ओर विद्यमान परिवेश की विशिष्टताएँ महसूस करता है और फिर उन्हें कनवास पर उतारने की कोशिश करता है। उस के द्वारा बनायी गयी कृतियों में मूर्त्त परिवेश और मनुष्य के वस्त्र और विशेष अवसर की ओर रुझान प्रकट होता है।
    इस के साथ-साथ, विक्तोर दिर्यूगिन द्वारा बनाये गये रूपचित्रों में कला-संबंधी अपनी बड़ी ख़ूबियाँ होती हैं: आयाम व आयतन के कोमल प्रकटीकरण के कारण, रंगतों की समानता पैदा हो जाती है और वह प्रकटीकरण कलाकार के लिये वर्णों के मौलिक लक्षणों का महत्त्व एवं बनावट की सुन्दरता को देखने में कोई रुकावट नहीं डालता।
    कलाकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक छविचित्र, चित्रकला की दृष्टि से, अद्वितीय होता है। चित्रकार कनवास पर (ग्लेज़िंग ढंग के द्वारा) रंगों का बारीक और झीना सा लेप चढ़ाता है। यह चित्रकला-संबंधी ऐसा ढंग है जिसे पुनर्जागृति एवं श्रेण्यवाद के युगों के महान् कलाकार लोग, जैसे: - श्रीमान् रेम्ब्रांट, श्रीमान् रुबेन्स और श्रीमान् पूस्सेन, प्रयोग में लाते थे।
    छविचित्रों के चौखटे या उनके फ़्रेम जिन में चित्रकार कनवास लगाता है वे भी प्राचीन कलाकारों की शैली में बने हैं। आम तौर पर, वे - भारी, स्थूलकाय एवं ढलाई से सुसज्जित स्वर्णमंडित मोल्डिंग की तरह होते हैं।
    चित्रित करते समय, चित्रकार का झुकाव स्थानिक पर्यावरण तथा परिस्थिति की ओर होता है, जिन में विक्तोर दिर्यूगिन द्वारा बनाये जानेवाले छविचित्र का नायक उपस्थित होता है, फिर चित्रण पैनल पेंटिंग की शैली के अनुसार अपना रूप धारण करता है। इस वजह से, विक्तोर दिर्यूगिन की बहुतेरी आकृतियाँ विभिन्न विषयवस्तुओं की तरफ़ आकृष्ट हो जाती हैं, उदाहरणतया: - रहन-सहनवाली, इतिहासाश्रित, सेना-संबंधी इत्यादि विषयवस्तु। इस प्रकार से, चित्र की संरचना नायक के रूपचित्र के अनुरूप बन जाती है। फिर चित्रकार विषयवस्तु के अनुसार ही चित्र की आकृति बनाते हुए, खुद रूपचित्र की बनावट कभी नहीं बिगाड़ता। विषयवस्तुओं के आपस में विलयन के सहारे से चित्रकार अपनी मूलभूत रचनात्मक अभिरुचियाँ स्वभावतः प्रकट कर सकता है, और वही विलयन अधिक स्पष्ट रूप से सामूहिक चित्रण में पाया जा सकता है।
    उस के बावजूद कि विक्तोर दिर्यूगिन की आधारभूत प्रवृति - रूपचित्र बनाना है, फिर भी उसकी सृजनात्मक प्रतिभा उसे चित्रकला-संबंधी अनेक दूसरे ढंग अपनाने आराम से देती है, जैसे कि: प्रकृति-चित्र, अचल-चित्र, पैनल पेंटिंग आदि। कलाकार द्वारा बनायी गयी कुछ कृतियों में सज्जाकार की उसकी योग्यता साफ़ नज़र आती है।
    यद्यपि चित्रकार बुनियादी तौर से क्लासिकीय शैली का निष्ठावान् होता है तथापि उसकी माहिरी उसे कला-संबंधी अन्य शैलियों का अवलंबन करने देती है। अंतरंग सज्जा-संबंधी चित्रकला की लोकप्रिय प्रणाली अपनाते हुए, (दूसरी शैलियों के आधार पर बनाये जानेवाले छविचित्र और तसवीरें, जो किसी मकान का भीतरी भाग सजाने के लायक़ नज़र आ सकते हैं) कलाकार अपने को श्रेष्ठ शैलीकार जैसा दर्शाता है, जो कला की अनेक शैलियों से अच्छी तरह अवगत रहता है।
    विक्तोर दिर्यूगिन – वह एक ऐसा चित्रकार है जो सर्वप्रथम उसी चीज़ का ख़याल रखता है कि हर छविचित्र या और कोई तसवीर ग्राहक की नज़र में रोचक आ सके, तथा सृजनशील व्यक्ति के रूप में स्वयं चित्रकार की नज़र में भी। दर्शक को स्वरूप और आशय के दृष्टिकोण से उसकी एक कृति दूसरी कृति से मिलती-जुलती कभी नज़र नहीं आएगी।
    कलाकार लगातार अपना ढंग परखता है और चित्रित करने की प्रणाली खोजता है, प्रतिमाओं का विन्यास बदलता है, एवं तरह-तरह के परिधानों, भिन्न-भिन्न अंतरंग सज्जाओं और कनवास की अलग-अलग नापों का उपयोग करता है।
    विक्तोर दिर्यूगिन अपेक्षाकृत जवान होते हुए भी, उसकी कलात्मक विरासत – पर्याप्त विशाल है। उसकी विरासत अभी भी कला-आलोचनात्मक अधिकतर गहरी अनुभूति की प्रतीक्षा में है। अखंड विश्वास है कि इक्कीसवीं शताब्दी की रूसी कला के इतिहास में यह चित्रकार अवश्य उचित और योग्य जगह प्राप्त कर लेगा।

    Louisa Petrovna Nekrilova, Art Critic